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देहरादून

उत्तराखंड में हर साल कहर बरपाती है आपदा, QRT के साथ बनाई जाएगी अकाउंट और कोर टीम, जानिए क्यों? उत्तराखंड में आपदा में क्यूआरटी निभाएगी अहम भूमिका, राहत बचाव के लिए कोर टीम समेत अन्य टीमों के गठन पर जोर

रिपोर्टर – ईशान श्रीवास्तव 

देहरादून: उत्तराखंड में हर साल जून महीने में मानसून दस्तक दे देती है, जिसमें अब महज एक महीना ही बचा है. ऐसे में आपदा प्रबंधन विभाग अभी से राहत बचाव संबंधित व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुट गया है. साथ ही आपदा के दौरान अहम भूमिका निभाने वाले टीमों के गठन पर भी जोर दिया जा रहा है.

पिछले साल आपदा प्रबंधन विभाग ने क्यूआरटी यानी क्विक रिस्पांस टीम (QRT) गठित की थी, तो वहीं इस साल आपदा से पहले क्यूआरटी के साथ ही रिकवरी एवं रिकंस्ट्रक्शन टीम राहत वितरण के लिए अकाउंट टीम और तमाम विभागों की कोर टीम बना रही है. ताकि, आपदा के दौरान ही आपदा के नुकसान का आकलन करने के साथ ही तत्काल प्रभाव से राहत वितरण किया जा सके.

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने दी अहम जानकारी

दो दिन बारिश का अलर्ट, एक महीने बाद दस्तक देगा मानसून: वर्तमान समय में भारी बारिश होने की संभावना को देखते हुए प्रदेश में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी है. मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के तहत 12 और 13 मई को प्रदेशभर में ऑरेंज अलर्ट और 14 मई तक येलो अलर्ट जारी किया गया है. जिसका असर प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों से लेकर पर्वतीय क्षेत्रों तक देखा जा रहा है, तो वही 21 जून के आसपास उत्तराखंड में मानसून के दस्तक की संभावना है.

यही वजह है कि आपदा प्रबंधन विभाग में लगातार बैठकों का दौर भी जारी है. जहां एक ओर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही आपदा प्रबंधन की तैयारी की समीक्षा बैठक कर चुके हैं, तो वही समय-समय पर मुख्य सचिव आनंद बर्धन भी तैयारियों के संबंध में बैठक कर रहे हैं. लगातार बैठकें होने की मुख्य वजह यही है कि पिछले साल आपदा की कमियों को दूर करते हुए व्यवस्थाओं को और बेहतर किया जा सके.

क्या बोले आपदा प्रबंधन सचिव? आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि पिछले साल क्यूआरटी यानी क्विक रिस्पांस टीम का कॉन्सेप्ट लाया गया था. जिसके तहत तहसील स्तर पर क्यूआरटी बनाई गई थी. इस टीम में पुलिस प्रशासन, फायर कर्मी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आपदा मित्र, युवा आपदा मित्र, मास्टर ट्रेनर, आपदा सखी, सेना और भूत पूर्व सैनिक को शामिल किया गया है.

“ऐसे में अब विभाग की कोशिश है कि मानसून से पहले क्यूआरटी की ट्रेनिंग करा दी जाए. साथ ही तहसील में मौजूद सभी उपकरण की प्रदर्शनी लगाकर उनके संचालन की ट्रेनिंग करा दी जाए. इसके अलावा एक रिकवरी एवं रिकंस्ट्रक्शन की टीम रहेगी. जो किसी भी आपदा के दौरान होने वाले नुकसान का आंकलन करेगी. साथ ही रिकवरी एवं रिकंस्ट्रक्शन का काम करेगी. इसके अलावा एक अकाउंट की टीम भी रहेगी, जो लेखा-जोखा का काम करते हुए राहत वितरण का भी काम करेगी.”- विनोद कुमार सुमन, आपदा प्रबंधन सचिव

उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन विभाग, तमाम विभागों को लेकर एक कोर टीम भी बना रही है, जो आपदा सीजन के दौरान 1, 11 और 21 तारीख को बैठक करेगी. बैठक के दौरान आपदा से क्या-क्या प्रभाव पड़ा है? क्या-क्या करने की आवश्यकता है? क्या-क्या हो रहा है? क्या कमियां है और इन कमियों को दूर करने के लिए क्या रणनीति अपनाई जाए? इस पर बातचीत करेगी. मानसून के दौरान आपदा के कार्यों के लिए क्यूआरटी का इस्तेमाल तो होगा ही, इसके अलावा क्यूआरटी का इस्तेमाल अन्य कामों में भी किया जा सकेगा.

दरअसल, जब गैस की किल्लत हुई थी, उस दौरान क्यूआरटी टीम ने तमाम जगहों पर छापेमारी की कार्रवाई की थी. ऐसे में जिला प्रशासन जरूरत पड़ने पर क्यूआरटी का इस्तेमाल अन्य कार्यों में भी कर सकेंगे. आपदा प्रबंधन विभाग विनोद कुमार सुमन ने बताया कि पिछले साल क्यूआरटी गठित होने के बाद अच्छे परिणाम सामने आए हैं.

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